Wednesday, January 27, 2010

बचपन से रहा है दिल में


वो मुझसे मुंह मोड़ कर जाएगा
भला कैसे वो छोड़ कर जाएगा
बचपन से रहा है दिल में,क्या
खुद का घर तोड़ कर जाएगा
दुआओं में असर है तो.. लौट
कर मेरे पास वो फिर आएगा

आसमान को नाप लेने दो उसे

थक कर तो जमीं पर आएगा
कियूँ फ़िक्र करूं उसके खोने की
घोंसला छोड़ कर किधर जाएगा

मेरा इश्क है मेरा दिलवर है वो

आखिर कंहा इधर उधर जाएगा
सुबह का भूला भटका मुसाफिर
शाम को लौट कर घर आएगा

मेरे नाम से ही जानेगे सब उसे

जंहा में जब भी जिधर जाएगा
मेरी याद आते ही तडप उठेगा
जब बेवफा से मन भर जाएगा

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