
तू दूर गागन से आई है ,
मैं धरती पर ही रहता हूँ ,
तू चाँद सितारे लायी है ,
मैं धरती पर ही सोता हूँ
न तेरा मेरा मेल कोई ,
तू ख्वाबों की परछाई है ,
मैं स्याही का हूँ दाग कोई ,
कागज़ पर छाप बनायीं है
तू बादल संग संग उड़ती है ,
मैं बारिश देखा करता हूँ ,
तुझ पर तस्वीरे बनती है ,
मैं रंग बटोरा करता हूँ
न तेरा मेरा मेल कोई ,
तू कलियों की अंगडाई है ,
मैं करवट हूँ दीवाने का ,
जिसने रातें जगवाई है
तू फूल कोई कोमल सा है ,
मैं काँटा बनकर चुभता हूँ ,
तू जन्नत के उपवन सा है ,
मैं रेगिस्तान में उगता हूँ
न तेरा मेरा मेल कोई ,
तू शीतल सी पुरवाई है ,
मैं कच्चा सा एक शायर हूँ ,
तुझ पर ही नज़्म बनायीं है
तू चाँद सी है, मैं लहर कोई ,
अपना मिलना नामुमकिन है ,
तू सूर्यमुखी, मैं रात घनी ,
कितना खुशकिस्मत वो "दिन" है
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